टेक्नोलॉजी से बदलेगी गांवों की तस्वीर – IAS निधि यादव

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  • नई दिल्ली की राष्ट्रीय कार्यशाला में पंचायत विकास योजनाओं और ई-ग्रामस्वराज पोर्टल पर हुआ मंथन

नई दिल्ली/देहरादून: पंचायत विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणामोन्मुखी बनाने के उद्देश्य से नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में उत्तराखंड पंचायतीराज विभाग की निदेशक निधि यादव ने प्रतिभाग किया। कार्यशाला में पंचायत विकास योजना (2026-27) की तैयारी, ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) की गुणवत्ता सुधार और तकनीक आधारित ग्रामीण विकास मॉडल पर विस्तृत चर्चा की गई।

कार्यशाला में जन योजना अभियान (PPC) पुस्तिका, ग्राम पंचायत विकास योजना की गुणवत्ता बढ़ाने संबंधी समिति की रिपोर्ट तथा नए स्वरूप में तैयार किए गए ई-ग्रामस्वराज योजना पोर्टल का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य सहभागी योजना प्रक्रिया को मजबूत करना और पंचायतों को विकास योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए तकनीकी रूप से सक्षम बनाना रहा।

 

 

पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स से होगी विकास की निगरानी

कार्यशाला में पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स (PAI 2.0) को ग्रामीण भारत में सतत विकास और सुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया गया। यह इंडेक्स पंचायतों की प्रगति का मूल्यांकन 9 प्रमुख विषयों के आधार पर करता है। अब कोई भी व्यक्ति बिना लॉगिन के अपनी पंचायत की रैंकिंग और विकास की स्थिति ऑनलाइन देख सकता है।

हर पंचायत अपनी प्रगति खुद देख सकेगी – निधि यादव

निदेशक निधि यादव ने कहा कि तकनीक के माध्यम से गांवों की तस्वीर बदलने का समय आ गया है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में ग्राम पंचायत विकास योजनाओं की गुणवत्ता सुधारने के लिए पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स का प्रभावी उपयोग किया जाएगा।

IAS निधि यादव ने कहा, “टेक्नोलॉजी अब केवल शहरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह गांवों के विकास की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभर रही है। पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स और ई-ग्रामस्वराज जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म गांवों की वास्तविक जरूरतों के अनुसार योजनाएं तैयार करने में मदद करेंगे। इससे पंचायतों की कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और परिणाम आधारित बनेगी। अब हर ग्राम पंचायत अपनी रैंकिंग और विकास की स्थिति स्वयं देख सकेगी तथा सुधार के लिए आवश्यक कदम उठा सकेगी। उत्तराखंड में हम ग्राम पंचायत विकास योजनाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए डेटा आधारित प्लानिंग को प्राथमिकता देंगे। हमारा प्रयास है कि हर गांव आत्मनिर्भर, तकनीकी रूप से सक्षम और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन वाला मॉडल गांव बने। सहभागी योजना प्रक्रिया के माध्यम से स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ेगी और गांवों के विकास में जनसहयोग को नई दिशा मिलेगी। आने वाले समय में टेक्नोलॉजी ग्रामीण अर्थव्यवस्था, आजीविका और सुशासन को मजबूत करने का सबसे प्रभावी माध्यम साबित होगी।”

 

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