कुंभ मेला-2027 : यातायात प्रबंधन बहुआयामी रणनीति पर कामऔर संपर्क मार्गों के सुदृढ़ीकरण पर विशेष फोकस

Listen to this article
  • मेलाधिकारी सोनिका ने अधिकारियों की टीम के साथ कुंभनगरी को जोड़ने वाले प्रमुख मार्गों, बाहरी क्षेत्रों एवं संपर्क मार्गों का लिया जायजा
  • नई सड़कों से बदली परिस्थितियों के मद्देनज़र संपर्क मार्गों के विस्तार, सुदृढ़ीकरण, नई पार्किंग व्यवस्था एवं बेहतर यातायात प्रबंधन योजना पर जोर

हरिद्वार : हरिद्वार में अगले वर्ष आयोजित होने वाले कुंभ मेले को सुव्यवस्थित और सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए मेला प्रशासन ने अपनी तैयारियों को और तेज कर दिया है। एनएच की नई सड़क परियोजनाओं के कारण हरिद्वार में यातायात की दशा और दिशा में संभावित बदलाव को ध्यान में रखते हुए मेला प्रशासन द्वारा कुंभ मेले के दौरान यातायात प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण जैसी जटिल चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए बहुआयामी रणनीति तैयार की जा रही है। साथ ही संपर्क मार्गों के विकास एवं सुधार तथा नए पार्किंग स्थलों की व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

इसी क्रम में मेलाधिकारी सोनिका ने अधिकारियों की टीम के साथ कुंभनगरी को जोड़ने वाले प्रमुख मार्गों, बाहरी क्षेत्रों तथा संपर्क मार्गों का व्यापक स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने निर्माणाधीन एवं प्रस्तावित कार्यों की प्रगति की समीक्षा की तथा नई सड़कों के निर्माण से उत्पन्न बदलती परिस्थितियों के मद्देनज़र संपर्क मार्गों के विस्तार, उनके सुदृढ़ीकरण, नए पार्किंग स्थलों की व्यवस्था और यातायात प्रबंधन की बेहतर कार्ययोजना तैयार करने के संबंध में विस्तार से चर्चा की।

शनिवार को आयोजित इस निरीक्षण अभियान के दौरान मेलाधिकारी ने बहरादराबाद, धनौरी, कलियर, मेहवड़, सालियर, नारसन और मंगलौर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों का दौरा किया तथा सड़कों, चौराहों और संपर्क मार्गों की स्थिति का बारीकी से जायजा लिया। कुंभ मेले के दौरान अधिकांश श्रद्धालु इन्हीं मार्गों से कुंभनगरी में प्रवेश करेंगे। इसे ध्यान में रखते हुए इन क्षेत्रों में यातायात के सुचारु संचालन, पार्किंग प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण को लेकर ठोस एवं व्यावहारिक योजना तैयार करने पर विशेष बल दिया जा रहा है।

निरीक्षण के दौरान मेलाधिकारी सोनिका ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा हरिद्वार बाईपास एवं रिंग रोड के निर्माण कार्यों का स्थलीय निरीक्षण कर कहा कि संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित किया जाए तथा इन परियोजनाओं को हर हाल में कुंभ से पूर्व पूर्ण कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि इन प्रमुख सड़क परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद हरिद्वार में वाहनों के प्रवेश एवं निकास मार्गों में महत्वपूर्ण बदलाव आएगा। नवनिर्मित दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के माध्यम से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के कुंभ क्षेत्र में आने की संभावना है, जिससे संबंधित मार्गों पर यातायात का दबाव बढ़ सकता है। इन बदलती परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संपर्क मार्गों का विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण, साथ ही बाहरी क्षेत्रों में पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था विकसित करना अत्यंत आवश्यक है। मेलाधिकारी ने इस संबंध में विस्तृत अध्ययन कर शीघ्र प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को ध्यान में रखते हुए समग्र यातायात योजना को अद्यतन किया जाएगा।

मेलाधिकारी ने नारसन बॉर्डर क्षेत्र का निरीक्षण करते हुए कहा कि कुंभनगरी के सभी प्रमुख प्रवेश स्थलों पर कुंभ मेला हरिद्वार एवं उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्ता को दर्शाने वाले आकर्षक एवं भव्य स्वागत द्वार स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन स्वागत द्वारों के निर्माण की प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ की जाए तथा नारसन बॉर्डर पर पार्किंग की समुचित और व्यवस्थित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

मेलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग तथा अन्य संबंधित एजेंसियों को निर्देशित किया कि मुख्य मार्गों से जुड़े संपर्क मार्गों की मरम्मत, चौड़ीकरण तथा आवश्यकतानुसार पुनर्निर्माण कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध ढंग से पूर्ण किया जाए। उन्होंने कुंभ मेले की मद से स्वीकृत पुलों के निर्माण कार्यों को भी निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए। मेलाधिकारी ने कहा कि मजबूत और सुगम संपर्क मार्ग ही प्रभावी यातायात व्यवस्था की रीढ़ होते हैं, इसलिए इनमें किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी स्वीकार्य नहीं होगी।

निरीक्षण के दौरान मेलाधिकारी ने सड़कों के किनारे पौधारोपण, हरित पट्टियों के विकास, स्वच्छता एवं सौंदर्यीकरण कार्यों पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कुंभ केवल आस्था का महापर्व नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास का भी संदेश देता है। हरित, स्वच्छ एवं सुव्यवस्थित कुंभनगरी का निर्माण प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है।

इस अवसर पर अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती, पुलिस उपाधीक्षक (कुंभ मेला) बिपेंद्र सिंह, मेला अधिष्ठान के तकनीकी सेल के अधिशासी अभियंता प्रवीन कुमार एवं अनुभव नौटियाल सहित लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, मेला कार्यालय तथा एनएचएआई के अधिकारी उपस्थित रहे।

More From Author

गोट वैली से बदली तकदीर : देवन गांव की पूजा कंडारी बनीं आत्मनिर्भर, पशुपालन बना सहारा

उत्तराखण्ड : पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में गर्जन के साथ बारिश

September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930